
शीला पंत – एक नाम जो प्रकृति प्रेम, आध्यात्मिकता, और अदम्य साहस का प्रतीक है। उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकली यह प्रतिभा आज एक प्रेरक वक्ता, सोशल इंफ्लुएंसर, कंटेंट क्रिएटर, और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जानी जाती है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
हल्द्वानी, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी शीला का लालन-पालन ग्रामीण परिवेश में हुआ। प्रकृति के साथ उनका गहरा नाता बचपन से ही रहा, जो आज भी उनके व्यक्तित्व और लेखन में झलकता है।
शीला की शैक्षिक यात्रा उत्कृष्टता से भरी रही:
- कुमाऊँ विश्वविद्यालय से स्नातक
- जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली से हिंदी में स्नातकोत्तर
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी में हास्य एवं व्यंग्य विधा पर एम.फिल.
- छह वर्षों तक पीएच.डी. का शोध कार्य
व्यावसायिक यात्रा
शीला ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता के क्षेत्र से की:
- राष्ट्रीय समाचार पत्र ‘संडे मेल’ और ‘दैनिक समाचार मेल’ (अपराह्न) में उपसंपादक
- बाद में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्य
उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र को विस्तारित करते हुए निम्नलिखित भूमिकाएँ निभाईं:
- समाजसेवी
- मानवीय मूल्यों पर केंद्रित लेखन
- पारिवारिक संबंधों और बाल पालन-पोषण पर परामर्शदाता
साहस और संकल्प की कहानी
नवंबर 2003 में, शीला के जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसने उनके अदम्य साहस और संकल्प को उजागर किया। इन के भवाली स्थित आवासीय परिसर में हुए भीषण अग्निकांड में, शीला ने न केवल अपने परिवार बल्कि अन्य निवासियों की भी जान बचाई। इस घटना में उनका छह वर्षों का शोध कार्य भस्म हो गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
इस घटना ने शीला के जीवन को एक नई दिशा दी। उनके साहस की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हुई, और उन्होंने इस अनुभव से सीखा कि जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए।
बहुमुखी प्रतिभा
शीला की प्रतिभा केवल लेखन तक सीमित नहीं है:
- बच्चों के लिए कविताएँ और कहानियाँ लिखना
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पाँच वर्षों तक सफलतापूर्वक ‘डे केयर सेंटर’ का संचालन
- प्रेरक वक्ता के रूप में विभिन्न मंचों पर व्याख्यान
व्यक्तिगत जीवन
शीला अपने पति श्री मुकेश पंत के साथ एक सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रही हैं। वे दो पुत्रों, राजीव और विक्रम, की माँ हैं और उन पर गर्व करती हैं।
दर्शन और मूल्य
शीला का जीवन दर्शन उनके अनुभवों से निर्मित हुआ है:
- “सीखने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती।”
- “अपने उद्देश्य को पाने के लिए मेहनत के आगे कोई विकल्प नहीं होता।”
- “दूसरों की बातों पर कान देने से अच्छा है अपने आप पर भरोसा करना।”
- “हमेशा अच्छे उद्देश्य को लेकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने में ही जीवन की सार्थकता है।”
वर्तमान गतिविधियाँ और भविष्य के लक्ष्य
आज, शीला एक सक्रिय सोशल मीडिया प्रभावक और कंटेंट क्रिएटर हैं। वे अपनी वेबसाइट sheelapant.com के माध्यम से:
- विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपने काम को प्रदर्शित करती हैं
- प्रेरक वक्ता और परामर्शदाता के रूप में कार्य करती हैं
- पुस्तक लेखन और विभिन्न प्रकाशनों में अपने लेखों को प्रकाशित करने की योजना बना रही हैं
शीला पंत का जीवन एक ऐसी कहानी है जो हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के साथ हम जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। वे आज भी उसी उत्साह और लगन के साथ नए सपने देख रही हैं और उन्हें पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं।